Monday, 6 September 2010

"सोचा न था..!!"

तुम अगर मुझे सुन लेती..
तो आज जिंदगी कुछ यूँ तो न होती !
कितने सपने सजाये थे मैंने..
सोचा न था कि जीवन-नैया अकेले चलाएंगे !!

मेरे पहलू में अगर कुछ देर बैठ जाती..
तो आज ये बेचैनी कुछ यूँ तो न होती !
तुम्हारे लिए कुछ चीजें खरीदीं थी मैंने..
सोचा न था की आज वो यूँ बर्बाद हो जायेंगे !!

मेरे साथ कुछ देर तुम चल लेती..
तो आज मंजिल कुछ यूँ तो न होती !
रास्ते तो हसीन बनाये थे मैंने..
सोचा न था कि यूँ हमसफ़र बदल जायेंगे !!
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1 comment:

  1. भावपूरण अभिव्यक्ति।

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