Tuesday, 18 January 2011

"तन्हाई से.... फिर तन्हाई तक...!!!"

"तन्हाई से.... फिर तन्हाई तक...!!!"

तूने ना कुछ  ख़ता  की.. 
ना मुझसे कोई  गलती हुई !
बस वक़्त ही मुझसे खफा हो गयी --
जो ये एहसास मुझे देर से हुई !!

तुमसे ना कोई शिकवा है ...
ना तुझसे कोई शिकायत करूँगा --
इस पल ने जो मीठे एहसास दिए..
उसके लिए तुम्हारा शुक्रिया कहूँगा !!

उन दिनों जब मैं तुम्हें सोचने  लगा--
मेरी दुनिया और सपने  बदल गयी..
तब मुझे पता चला ---
किसी को चाहना क्या होता है... !!

थोडा दर्द तो होगा मुझे...
इस एहसास को भुलाने में ! 
पर भरोसा है मुझे खुद पर --
कि संभल जाऊंगा मैं एक दिन !!
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