Saturday, 9 April 2011

"दुपट्टा..!!"




मुद्दतों बाद तेरा दुपट्टा मेरे सामने आया 
देखा इसे तो वो दिन याद आया...
कितनी जिद्द थी तुम्हें इसे लेने की
बड़े अरमानों से ख़रीदा था तुमने...
तेरी गर्दन की ये शान थी
लपेट कर जब तुम इसे चलती थी....
तेरी मतवाली चाल पर ये लहराती थी 
दूर से ही तुम्हें देखकर 
तेरी खुशबू महसूस हो जाती थी
जब तुम इस दुपट्टे से 
अपनी आखें बंद करके 
चेहरे को ढकती थी  और
दाँतों से जब दुपट्टे को कटती थी 
एक अजब सी  ख़ामोशी 
आस पास छा जाती थी 
और जब तुम अपनी आखें खोलतीं
तो मेरे ऊपर तेरी आखों की 
रेशमी चमक की बारिश होती थी...
मुद्दतों बाद तेरा दुपट्टा मेरे सामने आया 
देखा इसे तो वो दिन याद आया...
----------*----------


(H/English)
"Dupatta"
Muddaton baad tera dupatta mere saamne aaya
Dekha ise to vo din yaad aaya
Kitni zidd thi tumhain ise lene ki
Bade armaanon se kharida tha tumne...
Teri garden ki ye shaan thi
Lappet kar jab tum ise chalti thi...
Teri matwaali chaal par ye lahraati thi
Dur se hi tumhain dekhkar
Teri khushboo mahsus ho jaati thi
Jab tum is dupatte se
Apni aakhen band karke
Chehre ko dhaktin thi aur
Daaton se jab dupatte ko katati thi
Ek ajab si khamoshi
Aas paas chhaa jaati thi
Aur jab tum apni aakhen kholti thi
To mere upar teri aakhon ki
Reshami chamak ki barish hoti thi...
Muddaton baad tera dupatta mere saamne aaya
Dekha ise to vo din yaad aaya...
----------*----------

1 comment:

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