Saturday, 9 July 2011

"ख़ामोशी..!!"



एक ख़ामोश रात में
तनहा दोस्तों से दूर
आखें बंद कर एक बार
सोचा तुमको मैंने...
ये अकेली ख़ामोश रात 
और आखों से निकलते 
वो ख़ामोश आँसूं-
एक ख़ामोश सी चाहत 
कि काश तुम पास होती...
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2 comments:

  1. सुमन सौरभ जी सुन्दर रचना छोटी सी क्षणिका ने अजब मंजर ...होता है ये विरह जुदाई और प्यार के वे पल...
    भ्रमर ५

    और आखों से निकलते
    वो ख़ामोश आँसूं-
    एक ख़ामोश सी चाहत

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