Saturday, 31 December 2011

"नया साल..!!"



शाम फिर आज खाली खाली सी है
तन्हाई ने फिर
तनहा रहने की तरकीब निकाली है
दूर डूब रहा है सूरज
साथ में पुराने सारे पल 
अब नयी किरण आएगी 
नए साल के साथ 
सब कुछ नया होगा उस पल में 
नया साल होगा और पुराना मैं 
वक़्त कहता है टूट जाऊंगा मैं
पर जोड़ के खुद को खुद से
फिर से वापस आऊंगा मैं 
नयी किरण की ताजगी होगी
और फिर से मुस्कुराऊंगा मैं
कि नए साल में 
फिर नया होकर आऊंगा मैं 
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Friday, 16 December 2011

"तुम..!!"

तुम अब यूँ 
खामोश न रहा करो कि 
मेरी तन्हाइयों को कहीं 
तेरी खामोशियों से 
इश्क न हो जाये

खामखा आईने में देखकर
खुद पर इतराती हो
ये तो तेरे हर वज़ूद को
झुठला देती है
मेरे बिना तो तुम
खुद को संवार भी
नहीं पाती हो

ये कैसी मझधार है
कि खुद के अक्स से ही
जूझ रहा हूँ मैं
एक तिनके की आस में
बस तेरी ही राह
ओट रहा हूँ मैं...

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