Thursday, 22 January 2015

"मैं...!!"

मैं और मेरे अंदर का मैं
मारता हूँ पल पल एक मैं को
न जाने फिर भी
ज़िन्दा हैं  कितने मैं
ज़िन्दा हैं अभी भी
मेरे अंदर मेरा मैं
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Tuesday, 6 January 2015

"आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया...!!"






आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया....
चुन चुन कर दोस्तों की ...
महफ़िल सजाई थी मैंने !!
अपनी अपनी बात सभी ने सुनाई...
कुछ मैंने भी अपनी बताई !!
रात जब और बड़ी हुई...
महफ़िल का रंग भी गहराया...
वक़्त कैसे कटा...
कब रात बीती और कब उजाला हुआ...
महफ़िल टूटी कि मैं....
आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया..||
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