Tuesday, 6 January 2015

"आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया...!!"






आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया....
चुन चुन कर दोस्तों की ...
महफ़िल सजाई थी मैंने !!
अपनी अपनी बात सभी ने सुनाई...
कुछ मैंने भी अपनी बताई !!
रात जब और बड़ी हुई...
महफ़िल का रंग भी गहराया...
वक़्त कैसे कटा...
कब रात बीती और कब उजाला हुआ...
महफ़िल टूटी कि मैं....
आहिस्ता आहिस्ता फिर अकेला हो गया..||
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1 comment:

  1. sab sath hey... dost kabhi akela hone nahi dete hey..

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