बहुत खूब मूर्तियां भी सजीव होंगी कभी
खड़ा हूँ किसी मूर्ति की तरहमौसम आते हैं... मुझे छू कर गुजर जाते हैं.!!!!Wah Wah!!!!
खड़ा हूँ किसी मूर्ति की तरहमौसम आते हैं... मुझे छू कर गुजर जाते हैं.!!!!Wah Wah!!!
बहुत अच्छा, बढिया लिखती हैं आप। आभार
बहुत प्यारी रचना....सुन्दर लेखन..अनु
तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो तो शायरी में जो मोहब्बत है, उसे ज़िंदा कर दूँ.... हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...
बहुत खूब
ReplyDeleteमूर्तियां भी सजीव होंगी कभी
खड़ा हूँ किसी मूर्ति की तरह
ReplyDeleteमौसम आते हैं... मुझे छू कर गुजर जाते हैं.!!!!
Wah Wah!!!!
खड़ा हूँ किसी मूर्ति की तरह
ReplyDeleteमौसम आते हैं... मुझे छू कर गुजर जाते हैं.!!!!
Wah Wah!!!
बहुत अच्छा, बढिया लिखती हैं आप। आभार
ReplyDeleteबहुत प्यारी रचना....
ReplyDeleteसुन्दर लेखन..
अनु