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Monday, 23 May 2011

"चाय..!!"


चाय तो बहुत लोग पीते हैं
पर जब तुम पीती हो
तो बात ही कुछ और है
दोनों हाथों से प्याले को
पकड़कर जब तुम उसे
चूमती हो ----
तो वो सुर-सुराहट की आवाज़
मेरे कानों ने मिठास घोल देती है
चाय को अपने साँसों से
जब तुम फूंकती हो
तो बंद कमरे में सर-सराहट होती है
और माहौल में एक ताजगी घुल जाती है
तुम्हारे साथ चाय पीते वक़्त
कई बार ये ख्याल मन में आया ---
काश तुम मुझे भी अपने होठों से चूमती
अपने साँसों की हवा से स्पर्श करती
अगर कमबख्त चाय की जगह
मैं उस प्याले में होता...

"हक़...!!!"

 तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो  तो शायरी में जो मोहब्बत है,  उसे ज़िंदा कर दूँ....  हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...