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Saturday, 31 December 2011

"नया साल..!!"



शाम फिर आज खाली खाली सी है
तन्हाई ने फिर
तनहा रहने की तरकीब निकाली है
दूर डूब रहा है सूरज
साथ में पुराने सारे पल 
अब नयी किरण आएगी 
नए साल के साथ 
सब कुछ नया होगा उस पल में 
नया साल होगा और पुराना मैं 
वक़्त कहता है टूट जाऊंगा मैं
पर जोड़ के खुद को खुद से
फिर से वापस आऊंगा मैं 
नयी किरण की ताजगी होगी
और फिर से मुस्कुराऊंगा मैं
कि नए साल में 
फिर नया होकर आऊंगा मैं 
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"हक़...!!!"

 तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो  तो शायरी में जो मोहब्बत है,  उसे ज़िंदा कर दूँ....  हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...