मेरी चांदनी..
तेरे चेहरे की खिलती हंसी देख...,
सुबह आज हसीन दिख रही है !
तेरी जुल्फों में फंसा वो पानी का बूँद ,
तेरी जुल्फों में फंसा वो पानी का बूँद ,
जैसे ओंस की तरह चमक रही है !
अपनी नज़रों से यूँ न देखो मुझे ,
अपनी नज़रों से यूँ न देखो मुझे ,
कि एक अजब सी मदहोसी छा रही है !
तेरे आँचल को तुमने कुछ यूँ लहराया ,
तेरे आँचल को तुमने कुछ यूँ लहराया ,
कि बसंती हवा की बयार चल रही है !
अपने कदम संभाल कर तुम चलना ,
अपने कदम संभाल कर तुम चलना ,
वरना तेरी चाल पर हम बेमौत मारे जायेंगे !
आज तेरी तारीफ़ मैंने चाँद से कुछ यूँ की ,
आज तेरी तारीफ़ मैंने चाँद से कुछ यूँ की ,
कि वो तेरे दीदार को बेचैन हो गया...!
तुम आज रात पर्दा करके बाहर निकलना ,
तुम आज रात पर्दा करके बाहर निकलना ,
नहीं तो चाँद की नज़र 'मेरी चांदनी' को लग जाएगी....!!!!
----------*----------
