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Saturday, 21 January 2012
Monday, 10 October 2011
"जिद्द..!!"
एक दिन चला जाऊंगा मैं चुपके से...
पीछे छोड़ कर सभी को इस दुनिया से,
रूठना - मनाना सब रह जायेगा अधुरा...
कि बस मेरा शरीर रहेगा जलाने के लिए |
गरम शरद की बात ही क्या...
एक दिन तो जलना है चिता पर मुझे,
आग की लपटों से ऊँचा जाना है मुझे,
उठते धुएं से भी दूर निकलना है मुझे |
कर ले जितनी जिद्द करनी है तुझे...
मैं तो हर पल ही मुस्कुराऊंगा...
मना ले मुझे कि अभी भी वक़्त है तेरे पास,
बाद में क्या मेरी ख़ाक से दोस्ती निभाएगा ||
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Sunday, 17 April 2011
"तेरा शहर..!!"
सुबह होते ही तेरे शहर से जाना है मुझको,
आज की रात जरा मुझको मना कर सोना..
अगर हो सके तो लौटा दे मुझको मेरी हंसी..
या सारी रात मुझको रुला के सोना,
दीया याद का कोई बुझ न जाए कहीं..
कोई शमा प्यार की जला कर सोना...
मैं नहीं कहता कि रहो उम्र भर साथ मेरे..
बस आज की रात अपना बना कर सोना..
उम्र भर रहूँगा तेरी धड़कन में...
बस आज की रात तुम सीने से लगा कर सोना ||||
---------*---------
H/English
subah hote hi tere shahar se jana hai mujhko,
aaj ki raat zaraa mujko manaa kar sona..
agar ho sake to louta de mujhko meri hansi..
ya saari raat mujko rula kar sona,
diya yaad ka koi bujh na jaaye kahin,
koi shamaa pyar ki jalaa kar sona...
main nahi kahata ki raho umar bhar saath mere..
bas aaj ki raat apana banaa kar sona..
umar bhar rahunga teri dhadkan me..
bas aaj ki raat tum sine se lagaa kar sona||||
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H/English
subah hote hi tere shahar se jana hai mujhko,
aaj ki raat zaraa mujko manaa kar sona..
agar ho sake to louta de mujhko meri hansi..
ya saari raat mujko rula kar sona,
diya yaad ka koi bujh na jaaye kahin,
koi shamaa pyar ki jalaa kar sona...
main nahi kahata ki raho umar bhar saath mere..
bas aaj ki raat apana banaa kar sona..
umar bhar rahunga teri dhadkan me..
bas aaj ki raat tum sine se lagaa kar sona||||
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Monday, 28 February 2011
" फिर मिलेंगे...!!"
अलग-अलग शहरों से आकर, मिले हम एक अनजानी जगह में
सपने हैं बेगाने, मंजिलें हैं अलग, राहें हैं अनजानी, ढंग हैं अलग
आरम्भ में थे कुछ बिखरे बिखरे, बाद में दोस्ती ने कुछ रंग बिखेरे,
इसके एहसास ने ऐसा मिलाया हमें, कि हर महफ़िल में रंग जमने लगे ||
वक़्त बेवक़्त मिले, कहीं भी गए, ज़िन्दगी को लम्हों में जीने लगे,
एक नए सिरे से, एक नए तरीके से, जिंदगी यूँ ही बीत जाती तो अच्छा था ||
पर हम भूल गए कि ये जिंदगी है, वक़्त मिलाता है और जुदा भी करता है,
राहें आगे अभी और भी हैं, आगे और भी मुसाफिर कहीं हमारी इंतज़ार में हैं ||
मुझे अब तुमसे जुदा होने दो, कि आज वक़्त का यही दस्तूर है ,
तुम्हारे साथ गुजारे वो कुछ पल, याद आयेंगे ज़िन्दगी में रह-रह कर ||
तुम्हारी यादों में बसे, इतने भी हम खुशनसीब नहीं,
बस पहचान लेना मुझे, आगे के सफ़र में कभी,
मैं तो फिर मिलूँगा, यूं हीं चलते - चलते कहीं |||
सपने हैं बेगाने, मंजिलें हैं अलग, राहें हैं अनजानी, ढंग हैं अलग
आरम्भ में थे कुछ बिखरे बिखरे, बाद में दोस्ती ने कुछ रंग बिखेरे,
इसके एहसास ने ऐसा मिलाया हमें, कि हर महफ़िल में रंग जमने लगे ||
वक़्त बेवक़्त मिले, कहीं भी गए, ज़िन्दगी को लम्हों में जीने लगे,
एक नए सिरे से, एक नए तरीके से, जिंदगी यूँ ही बीत जाती तो अच्छा था ||
पर हम भूल गए कि ये जिंदगी है, वक़्त मिलाता है और जुदा भी करता है,
राहें आगे अभी और भी हैं, आगे और भी मुसाफिर कहीं हमारी इंतज़ार में हैं ||
मुझे अब तुमसे जुदा होने दो, कि आज वक़्त का यही दस्तूर है ,
तुम्हारे साथ गुजारे वो कुछ पल, याद आयेंगे ज़िन्दगी में रह-रह कर ||
तुम्हारी यादों में बसे, इतने भी हम खुशनसीब नहीं,
बस पहचान लेना मुझे, आगे के सफ़र में कभी,
मैं तो फिर मिलूँगा, यूं हीं चलते - चलते कहीं |||
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(H/English)
Alag-alag shaharon se aakar, mile hum ek anajaani jagah me
Sapne hain begaane, manjilen hain alag, raahen anjaani, dhang hain alag
Aarambh me the kuchh bikhre bikhre, baad me dosti ne kuch rang bikhere,
Iske ehsaas ne aisa milaya humain, ki har mahfeel me rang jamne lage ||
Waqt-bewaqt mile, kahin bhi gaye, zindgi ko lamhon me jine lage,
Ek naye sire se, ek naye tarike se, zindgi yun hi bit jaati to achchha tha ||
Par hum bhool gaye ki ye zindgi hai, waqt milata hai aur juda bhi karta hai,
Raahen aage abhi aur bhi hain, aage aur bhi musaafir kahin hamari intezaar me hain ||
Mujhe ab tumse juda hone do, ki aaj waqt ka yahi dastoor hai,
Raahen aage abhi aur bhi hain, aage aur bhi musafir kahin hamari intezaar me hain ||
Tumhaare saath gujaare wo kuch pal, yaad aayenge zindagi me rah-rah kar ||
Tumhari yaadon me basen, itne bhi hum khushnaseeb nahi,
Bas pahchaan lena mujhe, aage ke safar me kabhi,
Main to fir milunga, yun hi chalate - chalate kahin |||
----------*----------Sunday, 30 January 2011
"कलम - ...!!"
ऐ कलम मुझे माफ़ कर
जो मैं तुम्हें छोड़ कर
इस संभ्रम दुनिया में आया
सोचा छोड़ कर तुझे मैं जी लूँगा
इस दुनिया में
पर यहाँ आकर समझ में आया
कि ये पेचीदगी शायद
मुझसे सुलझेगी नहीं
ये एक ऐसी अत्यंत अनंत डोर है
जो खुद से उलझती जाती है
इसे सुलझाने की कोशिश में
मैं खुद ही इसमें उलझ कर रह गया
खुल तो नहीं पायीं ये सारी उलझनें
पर अब इस रिश्ते नाते के बंधन को
तोड़ कर आया हूँ मैं, तेरे शरण में
दुबारा पुनः एक बार
दे दो मुझे मेरी उँगलियों पर फिर से
वो काली स्याही के निशान
वो कोरे कागज के पन्ने
और किताबों की बारात
सजाना चाहता हूँ मैं फिर अपनी दुनिया
इसी शब्दों के बीच में
बेवकूफ था मैं जो इसकी बादशाहत
छोड़कर गया था इस निष्ठूर संसार में
इसलिए तेरे शरण में
लौट आया मैं सुमन , ऐ-- 'कलम'
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Wednesday, 19 January 2011
"मेरी चांदनी..!!!"
मेरी चांदनी..
तेरे चेहरे की खिलती हंसी देख...,
सुबह आज हसीन दिख रही है !
तेरी जुल्फों में फंसा वो पानी का बूँद ,
तेरी जुल्फों में फंसा वो पानी का बूँद ,
जैसे ओंस की तरह चमक रही है !
अपनी नज़रों से यूँ न देखो मुझे ,
अपनी नज़रों से यूँ न देखो मुझे ,
कि एक अजब सी मदहोसी छा रही है !
तेरे आँचल को तुमने कुछ यूँ लहराया ,
तेरे आँचल को तुमने कुछ यूँ लहराया ,
कि बसंती हवा की बयार चल रही है !
अपने कदम संभाल कर तुम चलना ,
अपने कदम संभाल कर तुम चलना ,
वरना तेरी चाल पर हम बेमौत मारे जायेंगे !
आज तेरी तारीफ़ मैंने चाँद से कुछ यूँ की ,
आज तेरी तारीफ़ मैंने चाँद से कुछ यूँ की ,
कि वो तेरे दीदार को बेचैन हो गया...!
तुम आज रात पर्दा करके बाहर निकलना ,
तुम आज रात पर्दा करके बाहर निकलना ,
नहीं तो चाँद की नज़र 'मेरी चांदनी' को लग जाएगी....!!!!
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Sunday, 9 January 2011
"बेबसी...!!!"
"बेबसी...!!!"

आज कोरे काजग में क्यों...
अपने जीवन का कोरापन दिखता है |
बैठा था कुछ लिखने फ़साने जीवन के..
क्यों मेरे आंसुओं से ये गिला हो जाता है ||
हसरतें बहुत हैं उमड़ती मेरे अन्दर--
पर हो गया हूँ मैं बेबस इस तरह कि...
इस ठूंठ दुनिया में ------
जिंदगी एक छांव की तालाश करती है ||
अपनों ने भी ठुकराया ऐसे कि....
अब किसी पर आस होती नहीं है |
दे दो मुझे सहारा एक बैसाखी का...
कि मेरे पैर भी अब लाचार दिखते हैं |||
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Friday, 10 December 2010
"बढती ज़िन्दगी ..!!"
कुछ दोस्त थे जो समझते थे,
कुछ दोस्त थे जो समझाते थे |
कुछ थे जिनको कुछ सिखाता था,
कुछ थे जिनसे खुद मैं सीखता था ||
अब रह गयी बाकी कुछ एहसास---
फिर सब कुछ पहले सा कहाँ होता है ....
करता है कुछ सिकवा-शिकायत ये दिल ---
लेकिन, फिर से शामिल दुनिया में होता है ||
ना... थमेगी ये जिंदगी ....
ना यहाँ कुछ रुकता सा दिखता है |
मालूम है तुम संभल जाओगे ....
दर्द तो सिर्फ एक शायर को होता है ||
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Tuesday, 23 November 2010
"अच्छे थे हम जब बच्चे थे..!!"
एक एक करके सब अपने छूटे
सारे रिश्ते- नाते और बंधन टूटे
क्या मिला हमें बड़ा होकर
हार कर हम सबसे रूठे
तेरी ख़ुशी में ख़ुशी मनाता था
हमेशा महफिल में शामिल था
क्या थे वो मासूम से रिश्ते
जो हर दर्द मिटा जाते थे
खेले थे हम साथ साथ
साथ में दौड़ लगायी थी
ये कैसा दौड़ाया जीवन ने
ये कैसा दौड़ाया जीवन ने
कि हम साथ छोड़कर भाग गए
अच्छे थे हम जब बच्चे थे
सच्चे थे वो काम जो होते थे
झूठ - फरेब तो उम्र ने सिखाया
अब लगता है --
अच्छे ही थे जब हम बच्चे थे
अच्छे ही थे जब हम बच्चे थे
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Monday, 22 November 2010
"आज पूनम की रात आई है..!!"
आज पूनम की रात आई है...
चांदनी की एक लहर ,
झरोखे से घर में घुस आई है |
ऐसा मानो जैसे रात में ,
दूध की नदी बह आई है ||
हवा चली है मद्धम मद्धम,
एक नयी खुशबू सी फ़ैल आई है |
कमरे में एक ताजगी है ,
और स्फूर्ति सी मन में छाई है ||
कि आज पूनम कि रात आई है....
खिड़की से जब बाहर देखूं...
दूर- दूर तक सड़कों पर -
एक वीरानी सी छाई है |
सारी सुन्दरता आज बस ,
उस चाँद में ही समाई है ||
कि आज पूनम कि रात आई है ....
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Thursday, 18 November 2010
"दूर...!!!"
ये एक साल घर से दूर परिवार से दूर
दोस्तों और सभी रिश्तेदारों से दूर
खुद में खोया, खुद को सोचा
पर न जाने किस उधेड़बुन में फंसा
इस अकेलेपन में मैंने समय को पार होते देखा
हर एक - एक पल मैंने इंतज़ार करके गुजारा
कुछ भी ना कर पाया हांसील इस एक साल में
सिर्फ अपने बढ़ते उम्र के सिवा
कुछ चेहरे मिट गए कुछ सूरतें बनती रहीं..
कुछ को याद बना लिया कुछ हसरतें हो गयी
आज रो रहा हूँ दूर होकर सभी अपनों से
ऐसा लग रहा है मुस्कुराने की सज़ा मिल गयी
दोस्तों और सभी रिश्तेदारों से दूर
खुद में खोया, खुद को सोचा
पर न जाने किस उधेड़बुन में फंसा
इस अकेलेपन में मैंने समय को पार होते देखा
हर एक - एक पल मैंने इंतज़ार करके गुजारा
कुछ भी ना कर पाया हांसील इस एक साल में
सिर्फ अपने बढ़ते उम्र के सिवा
कुछ चेहरे मिट गए कुछ सूरतें बनती रहीं..
कुछ को याद बना लिया कुछ हसरतें हो गयी
आज रो रहा हूँ दूर होकर सभी अपनों से
ऐसा लग रहा है मुस्कुराने की सज़ा मिल गयी
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Saturday, 18 September 2010
"आज फिर..!!"
आज फिर -
मैंने महसूस किया तुम्हें अपने दिल में,
तेरी खुशबू से मन में बहार आई..
तुम्हारी याद ने छुआ मुझे,
और तेरी वो रंगीन गज़ल याद आई !!
आज फिर -
जब अपने अक्स को देखा आईने में,
तो तेरी ही परछाई नज़र आई..
खो जाऊं फिर तुममे ही कहीं मैं,
और तेरी वो चांदनी रात याद आई !!
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Wednesday, 8 September 2010
"उसने..!!"
है शुक्र उस मुखड़े का,
जिसकी याद की तपिश से,
इतना निखर गया हूँ मैं !
जिस मुखड़े को देख --
मुस्कुराता था मैं....
नज़रों की एक टक्कर से ही..
सिने में हलचल होती थी !
अब तो उस मुखड़े की याद से ही..
आखें भर आती हैं---
पहले जिसे अपना कहने में ...
कोई संकोच ना था ...
ज़िन्दगी कैसे जियें ---
इसका भी होश ना था...
बस उसके साथ बैठे हुए,
वक़्त गुजर रहा था !
है शुक्र कि उसकी तन्हाई ने...
मुझे जीना सिखा दिया !
अब हर मुखड़े को देख मुस्कुराता हूँ मैं..
कि उसने मुझे अब ---
खुद से प्यार करना सीखा दिया ..!!
----------*----------
.
जिसकी याद की तपिश से,
इतना निखर गया हूँ मैं !
जिस मुखड़े को देख --
मुस्कुराता था मैं....
नज़रों की एक टक्कर से ही..
सिने में हलचल होती थी !
अब तो उस मुखड़े की याद से ही..
आखें भर आती हैं---
पहले जिसे अपना कहने में ...
कोई संकोच ना था ...
ज़िन्दगी कैसे जियें ---
इसका भी होश ना था...
बस उसके साथ बैठे हुए,
वक़्त गुजर रहा था !
है शुक्र कि उसकी तन्हाई ने...
मुझे जीना सिखा दिया !
अब हर मुखड़े को देख मुस्कुराता हूँ मैं..
कि उसने मुझे अब ---
खुद से प्यार करना सीखा दिया ..!!
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Friday, 3 September 2010
"जिंदगी का रंग..!!!
ऐसा कहते हैं, मौत का रंग काला होता है,
तो जिंदगी मुझे क्यों काली दिखती है
मेरा अक्स मुझसे कुछ कहना चाहता है,
हर वक़्त एक दर्द मेरे दिल में होता है
ये जिंदगी अब बोझ सी लगती है,
मौत आ नहीं रही, इसलिए जीता हूँ
ऐसे जीने में कोई संतोष नहीं होता है,
क्यों आयें हैं यहाँ, सोच कर रोता हूँ
क्यों ज़माना इतना मतलबी होता है,
दूसरों के लिए कभी वक़्त नहीं रहता है
जब मैं अपने अन्दर झांकता हूँ,
एक अजीब भयानक मंजर दिखता है
सच है जिंदा हो कर भी मर गया हूँ मैं,
इसलिए ज़िन्दगी का रंग अब काला दिखता है !!
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"परछाई..!!"
कल रात सपने में वो आई,
उसकी याद जहन में फिर यूँ समाई..
कि दिल में एक उन्स हुआ --
और आखें डब - डबाई !
उसकी अनुपस्थिति में ...
मुझे खाए है ये तन्हाई !!
जाने कहाँ चली गयी है वो,
कि उसकी कोई सन्देश न आई ..
दिल बार - बार दे ये दुहाई,
जाने कब लौट कर आये वो हरजाई !
दिन के उजाले में भी घेरे है ,
मुझे उसकी यादों कि गहराई..!
आखों के सामने आज फिर बनी है ..
उसकी भीगी सी परछाई !!!!
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"हक़...!!!"
तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो तो शायरी में जो मोहब्बत है, उसे ज़िंदा कर दूँ.... हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...
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तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो तो शायरी में जो मोहब्बत है, उसे ज़िंदा कर दूँ.... हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...
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कितना खुश था मैं माँ जब मैं तेरे अन्दर था माँ इस दुनिया से बचाकर कर रखा था तुमने कितने प्यार से पाला था तुमने ...
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तब ... घर से जब बाहर निकलता था कब दोपहर हुई ...कब शाम हुई रात ने कब घेरा पता ही नहीं चलता था और वापस लौटना ही भूल जाता था तब ... मा...






