Saturday, 31 March 2012

"बारिश..!!"


बारिश की वो पहली बूँद जब पलकों पर गिरी
तेरी पहली छुअन का मेरे मन को एहसास हुआ
तेरे साथ जो गुजारे थे वो खुबसूरत पल 
हर क्षण में उसकी भूली हुई सी याद के भंवर में घूमता रहा
जाने वो कौन सी मनहूस घड़ी थी
मेरे आगोश से तुझे जुदा कर गयी...
आज भी सावन की पहली बूंदों में 
तेरी ताज़गी को महसूस करता हूँ
यही सोच कर अक्सर मैं ---
बारिश में अकेला ही भीग लेता हूँ....
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Sunday, 18 March 2012

"साथ..!!"


तुम लाख खाओ शहद और मिठाई
मेरे इश्क से मीठा कुछ भी नहीं 
मुझसे बेहतर कोई तुम्हें
हमसफ़र न मिलेगा....
थक जो जाओ तुम इस सफ़र में
शुकून देने वाला ऐसा कन्धा न मिलेगा 
मैं जो अगर होता तेरे पास 
तो तेरी बात ही कुछ और होती 
महफ़िल में रंग तुमसे जमता 
फिर हर शाम तेरी हसीन होती
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Monday, 20 February 2012

"अनिश्चित..!!"



कुंवारी नींद जब चल कर आती है
आखें बन जाती हैं मेरी स्वप्न नयना 
कौन जाने कल सवेरा हो न हो 
इस संसार में है निश्चित कुछ भी नहीं
सिर्फ अनिश्चित है, निश्चित हर क्षण में यहाँ
ये तो पता नहीं कि हम फिर मिलेंगे 
अभी का ये वक़्त हैं अपना लो मुझे 
देख लो आज चाँद को आसमान में 
कौन जाने कल ये रात हो न हो
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Friday, 10 February 2012

"दीदार..!!"



कल देखा था तुम्हें मुस्कुराते हुए
इसी जगह पर कहीं
फूल खिले थे चमन में
तेरे चहकने से यहीं 

तेरा रूप देखा तो 
मेरे दबे हुए ख्यालों को 
एक मुकाम मिल गया

बरसों से नहीं सोया था
इस थके आखों को 
एक सहारा मिल गया 

सामने तो तू अब है नहीं
सपने में मिलने का 
एक बहाना मिल गया

आशिकी की नहीं है मैंने 
पर तेरा दीदार
मुझे दीवाना बना गया
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Saturday, 21 January 2012

"इश्क..!!"


एक इश्क है दुनिया में 
जो दौलत से नहीं मिलती 
कहने को तो दुनिया में 
बाज़ार हजारों हैं
इस हुस्न की दुनिया में 
दिलदार हजारों हैं
एक तुम्ही को हमने 
इस दिल में बसाया है
कहने को तो दुनिया में 
दिलदार हजारों हैं
मैं देख चूका हूँ ये
इस आज की दुनिया को
मारे हुए मतलब के
यार हज़ारों हैं...
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Saturday, 31 December 2011

"नया साल..!!"



शाम फिर आज खाली खाली सी है
तन्हाई ने फिर
तनहा रहने की तरकीब निकाली है
दूर डूब रहा है सूरज
साथ में पुराने सारे पल 
अब नयी किरण आएगी 
नए साल के साथ 
सब कुछ नया होगा उस पल में 
नया साल होगा और पुराना मैं 
वक़्त कहता है टूट जाऊंगा मैं
पर जोड़ के खुद को खुद से
फिर से वापस आऊंगा मैं 
नयी किरण की ताजगी होगी
और फिर से मुस्कुराऊंगा मैं
कि नए साल में 
फिर नया होकर आऊंगा मैं 
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Friday, 16 December 2011

"तुम..!!"

तुम अब यूँ 
खामोश न रहा करो कि 
मेरी तन्हाइयों को कहीं 
तेरी खामोशियों से 
इश्क न हो जाये

खामखा आईने में देखकर
खुद पर इतराती हो
ये तो तेरे हर वज़ूद को
झुठला देती है
मेरे बिना तो तुम
खुद को संवार भी
नहीं पाती हो

ये कैसी मझधार है
कि खुद के अक्स से ही
जूझ रहा हूँ मैं
एक तिनके की आस में
बस तेरी ही राह
ओट रहा हूँ मैं...

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"हक़...!!!"

 तुम जो अगर, मुझ पर प्यार से.... अपना एक हक़ जता दो  तो शायरी में जो मोहब्बत है,  उसे ज़िंदा कर दूँ....  हम तो तेरी याद में ही जी लेंगे ... तु...