
जाने किसकी लगन, किसकी धुन में मगनजा रहे थे कहाँ, मुड़कर देखा नहींहमने आवाज़ पर तुमको आवाज़ दीतुम ये कहते हो, हमने पुकारा नहींमैं भी घर से चला हूँ, यही सोच करआज नज़रें नहीं, या नज़ारा नहीं..!!!
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hmmmm... goooood one..:)
ReplyDeleteThanks...:)
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